कसूर!!

कसूर ना हमारा था ना उनका!

कसूरवार तो ये जालीम वक्त ठेहरा

और शिकार दो आशीक हुए!

शायरी #2

आपको पहचान ने मैं कही हमने खता कर दी
या फिर पहचान छिपाने मै आपने कोई सफाई कर ली
इसका पता तो ना वक्त के पास था
ना उस कमबख्त मोहब्बत के पास