Bewafaa

अरसो बाद आज कलम उठायी थी
जुटाकर कुछ ल्फझ लिखी अपनी कहानी थी
तेरी उस सफाई से की बेवाफाई को शब्दो मै उतारणा चाहा हमने
तब अल्फाझों ने भी हार मान ली हमारे इस टुटे दिल से
कहा उन अल्फाझों ने इस टुटे टुकडे से
रोकर तो वक्त बीत जाएगा
अश्को से बस्स दामन भिग जाएगा
पर इस घायल भरोसे को मरहम अब कोन लगाएगा
सिमटकर अपने आसू जवाब मै उस दिल ने बस इतना कहा
कि आज भी रुखा हूं की कही वो आ जाये
आकर हमे अपने साथ ले जाये

क्योकी
जितनी सफाइ से तुने बेवफाई की थी
उतनी ही शिद्दत से मोहब्बत हमने भी तो की थी

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